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नौवीं से 12वीं तक अब निश्‍शुल्‍क चैनल पढ़ाई

नौवीं से 12वीं तक अब निश्‍शुल्‍क चैनल पढ़ाई

रायपुर  शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। दो साल तक पढ़ाई के हुए नुकसान की भरपाई के लिए राज्य में कक्षा नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए सालभर निश्‍शुल्‍क चैनल के माध्यम से पठन-पाठन सामग्री का प्रसारण किया जाएगा। कक्षा नौवीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं के बच्चों के लिए चार निश्शुल्क चैनल चलेंगे। स्थानीय ई-पाठ्य सामग्री का प्रसारण 24 घंटे में चार बार होगा। रात 12 बजे से अगले दिन की रात 11:59 बजे तक विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार समय तय कर सकेंगे।

इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फार स्पेस एप्लीकेशंस एंड जियो-इन्फार्मेटिक्स ने शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर सहमति दे दी है। स्कूलों में आफलाइन कक्षा के दौरान जो पाठ पढ़ाया जाएगा, वहीं पाठ डीटीएच, टाटा स्काई, डिश टीवी और जियो टीवी में निश्शुल्क प्रसारित होगा। इन चैनलों के प्रसारण का खर्च केंद्र सरकार उठाएगी।
हाई व हायर सेकेंडरी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम के अनुसार जुलाई से महीनेवार पढ़ाई शुरू हो जाएगी।राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के एजुसेट सेटेलाइट के माध्यम से इंटरनेट विहीन वनांचलों में भी इस चैनल का फायदा विद्यार्थी उठा पाएंगे।
प्रधानमंत्री ई-विद्या 200 प्लस योजना के तहत एक चैनल एक कक्षा के तहत पहली से 12वीं तक की कक्षाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की व्यवस्था करनी है। टीवी, मोबाइल और रेडियो के माध्यम से सभी क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा मुहैया कराई जानी है। प्रदेश में अभी तक कक्षा नौवीं से 12वीं तक के एक लाख 60 हजार मिनट के वीडियो पठन-पाठन सामग्री का पाठवार निर्माण किया गया है।
ये डिजिटल पाठ्य सामग्रियां भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट को भेजी जाएंगी और वहां से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के माध्यम से इसका प्रसारण होगा। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डा. आलोक शुक्ला का कहना है कि ई-विद्या के माध्यम में हम स्थानीय पठन-पाठन सामग्री का प्रसारण करने के साथ-साथ अन्य उपयोग सामग्री भी प्रसारित कर सकेंगे।
प्रत्येक रविवार को विद्यार्थियों के लिए रोजगार मार्गदर्शन, प्रेरक भाषण, प्रायोगिक गतिविधियां, सामाजिक सरोकार, कला-संस्कृति आदि की कक्षाएं लगाई जाएंगी। एससीईआरटी के सहायक प्राध्यापक व मल्टीमीडिया ई-कंटेंट नोडल आफिसर दीपांकर भौमिक ने बताया कि हमारे पास कक्षा नौवीं से 12वीं तक के बच्चों के लिए सालभर चार-चार घंटे पढ़ाने के लिए डिजिटल पठन-पाठन सामग्री मौजूद है।
ये होंगे फायदे
– उच्च गुणवत्‍ता की पठन-पाठन सामग्री से सभी विद्यार्थी समान रूप से लाभान्वित होंगे
– स्कूल नहीं जा पाने वाले विद्यार्थियों के लिए यह बेहतर विकल्प के रूप में होगा
– स्कूल में पढ़ाई करने के बाद घर में दोबारा पढ़ने का अवसर मिल सकेगा
– विद्यार्थियों के साथ-साथ अभिभावक भी पाठ्यक्रम से पूरी तरह अवगत रहेंगे

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