




दुर्घटनाग्रस्त कोच को उठाने के लिए 140 टन की क्रेन भी पहुंच गया। क्रेन की मदद से कोच को हटाया गया। लगभग एक घंटे तक राहत-बचाव चला। दरअसल, रेल हादसे के बाद टीम को किस तरह काम किया जाना चाहिए, सूचना के बाद कितने समय के अंतराल पर एआरटी पहुंची। राह और बचाव कार्य किस तरह से किया जाता है। ट्रेन हादसे के बाद कैसे रेलवे की टीम अलर्ट होकर काम करती है। इस परखने के लिए माकड्रिल किया गया।
500 से ज्यादा कर्मी, विभागीय पदाधिकारी भी थे
एक कोच को क्रेन के सहारे दूसरे कोच के ऊपर चढ़ा दिया। डीआरएम ने कहा कि क्षतिग्रस्त कोच को टिल्टिंग जैक से पटरी पर लाने, हाइड्रोलिक रिफिलिंग उपकरण से कोच को ट्रैक पर फिर लाने को लेकर भी होने वाली कार्रवाई की जांच की गई।
आरपीएफ और एनडीआरएम अलर्ट
माकड्रिल में बताया गया कि हादसे में जख्मी हुए लोगाें को किस तरह अस्पताल ले जाया जात है। दूसरे कोच में सवार सुरक्षित यात्रियों को दूसरी ट्रेन और सड़क मार्ग से गंत्वय तक पहुंचाया गया। माकड्रिल में एनडीआरफ की पूरी टीम अपनी व्यवस्था के साथ थीं। रेल दुर्घटना को व्यवस्थित करने में सभी दिखे। विधि व्यवस्था बहाल करने को लेकर आरपीएफ जीआरपी व स्थानीय पुलिस भी अलर्ट दिखीं।