बीजेपी नेता गिरफ्तार, सहकारी बैंक में अध्यक्ष रहने के दौरान करोड़ों रुपये गबन करने का लगा आरोप

दुर्ग। गोदाम निर्माण और एकमुश्त समझौता योजना के तहत गलत तरीके से 14 करोड़ 89 लाख 11 हजार रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में पुलिस ने जिला सहकारी केंद्रीय मर्यादित बैंक के पूर्व अध्यक्ष प्रीतपाल बेलचंदन को दुर्ग कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित के खिलाफ आठ मार्च 2021 को दुर्ग कोतवाली थाना में धोखाधड़ी, गबन और कूटरचना की धाराओं के तहत प्राथमिकी की गई थी। एफआइआर के बाद आरोपित ने हाई कोर्ट से स्टे ले लिया था। इस कारण से उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई थी। हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए समय सीमा के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। जिसके बाद अब पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।

पुलिस ने बताया कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी पंकज सोढ़ी ने आठ मार्च 2021 को दुर्ग कोतवाली थाना में शिकायत की थी। उन्होंने शिकायत के साथ एक जांच प्रतिवेदन भी पेश किया था। जिसमें अपर कलेक्टर दुर्ग, अंकेक्षण अधिकारी तथा सहकारिता निरीक्षक की संयुक्त टीम द्वारा की गई जांच का विवरण था। उसके आधार पर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित के पूर्व अध्यक्ष प्रीतपाल बेलचंदन (65) निवासी उजाला भवन के पास संतराबाड़ी दुर्ग के खिलाफ प्राथमिकी की गई थी। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित दुर्ग के पूर्व अध्यक्ष प्रीतपाल बेलचंदन को रविवार को गिरफ्तार कर न्यायालय पेश किया गया। जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। वहीं इस मामले में अन्य आरोपितों की संलिप्तता की जांच की जा रही है। पुलिस ने बताया कि इस मामले में अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी भी की जा सकती है।

प्रीतपाल बेलचंदन पर आरोप था कि उन्होंने अध्यक्ष रहने के दौरान आठ अप्रैल 2014 से 12 मई 2020 के बीच पंजीयक सहकारी संस्थाएं छत्तीसगढ़ की अनुमति के बिना 234 प्रकरणों में गोदाम निर्माण के लिए 13 करोड़ 13 लाख 50 हजार रुपये का अनुदान स्वीकृत किया था। साथ ही पांच अगस्त 2016 से 12 जून 2019 के बीच एकमुश्त समझौता योजना (ओटीएस) के तहत नियम विरुद्ध 186 प्रकरणों में एक करोड़ 75 लाख 61 हजार रुपये की छूट प्रदान कर शासकीय निधि का दुरुपयोग किया था। जबकि एकमुश्त समझौता योजना के तहत छूट प्रदान करने का आरोपित को अधिकार भी नहीं था। इस तरह से आरोपित ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए शासन एवं जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दुर्ग को आर्थिक नुकसान पहुंचाते हुए धोखाधड़ी की थी।

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